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आँसू तब बहते हैं जब शब्द साथ छोड़ देते हैं और दिल का दर्द भीतर ही भीतर भर जाता है। crying shayari उसी पीड़ा, बेबसी और टूटन को संवेदनशील शब्दों में ढालती है, जिससे भावनाएँ बाहर आकर मन को थोड़ा हल्का कर देती हैं।

जब किसी अपने की याद, जुदाई या नाकामी दिल को रुला दे, तब शायरी ही वह सहारा बनती है जो दर्द को समझती है। यह कलेक्शन उन पलों को समेटता है जब रोना कमज़ोरी नहीं, बल्कि भीतर जमी पीड़ा को निकालने का सबसे सच्चा तरीका बन जाता है।

1.
ग़म की बारिश में भीगते हैं अक्सर वो लोग,
जो मुस्कान में भी दर्द छुपा लेते हैं…

2.
तेरे बिना अधूरी सी लगती है ज़िंदगी,
हर खुशी अब तो बस एक याद बन गई है…

3.
तेरी यादें इस दिल से मिटती नहीं,
चाहे कितनी भी कोशिशें कर लूं…

4.
जिसे चाहा था दिल से, वही दिल तोड़ गया,
हमने तो वफ़ा की थी, मगर वो औरों में खो गया…

5.
तन्हाईयों से मत डरा करो,
असली हमदर्द वही होते हैं…

6.
खामोशियाँ बोल जाती हैं अक्सर,
जिनका कोई जवाब नहीं होता…

7.
तेरा ख्याल भी अब दर्द देता है,
फिर भी खुद को रोक नहीं पाते…

8.
टूटे दिल की आवाज़ नहीं होती,
हर मुस्कान के पीछे एक उदासी होती है…

9.
तुम्हें चाहा भी और खो भी दिया,
ये कैसी मोहब्बत थी जो मुकम्मल ना हुई…

10.
रात भर जागते रहे तेरी याद में,
नींद भी अब तुझसे नाराज़ है…

11.
हर किसी से दिल लगाना आसान नहीं होता,
और जिस पे लगे, उसे भूल पाना आसान नहीं होता…

12.
हमने जब भी चाहा, बेपनाह चाहा,
और जब छोड़ा, तो अपनी जान समझ के छोड़ा…

13.
काश वो समझ पाते मेरे दिल की बात,
तो आज यूँ जुदा न होते हम…

14.
वक़्त के साथ सब बदल गया,
मगर दर्द आज भी वहीं का वहीं है…

15.
हमने जिनसे मोहब्बत की,
वो ही हमें भूल गए…

16.
आँखों में आंसू हैं पर मुस्कान होठों पे है,
ये मोहब्बत भी क्या-क्या खेल खेलती है…

17.
तुमसे दूर रहकर भी तुम्हें महसूस करते हैं,
ये दूरी भी अजीब सी मोहब्बत बन गई है…

18.
अब तो तेरी यादें भी तड़पाती नहीं,
शायद दर्द भी अब थक गया है…

19.
कभी सोचा न था यूँ अकेले रहना पड़ेगा,
तेरे बिना दुनिया अधूरी लगती है…

20.
जिसे टूट कर चाहा,
वो ही हमें तोड़ गया…

21.
तेरे जाने से कुछ नहीं बदला,
बस अब किसी से दिल लगाने की हिम्मत नहीं रही…

22.
हम उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहाँ दिल भी नहीं रहा और तेरा इंतज़ार भी…

23.
झूठे लोग रिश्ते निभा जाते हैं,
और हम सच्चे होकर भी अकेले रह जाते हैं…

24.
जिसको दिल से चाहा वो कभी हमारा हुआ ही नहीं,
कभी खुदा भी खामोश हो जाता है…

25.
अब किसी से मोहब्बत करने का मन नहीं करता,
दिल अब सिर्फ अकेले रहना चाहता है…

26.
बातें तो बहुत की तुमसे,
पर जो दिल में था वो कभी कह न सके…

27.
दर्द छुपाना आता है अब,
क्योंकि दुनिया को बस तमाशा चाहिए…

28.
दिल तो अब किसी से भी नहीं लगता,
तेरे बाद सब अधूरा सा लगता है…

29.
तेरी बेरुखी ने मुझे बदल दिया,
अब तो अपना भी दिल नहीं लगता…

30.
हर रात तेरी यादों में कटती है,
और हर सुबह तन्हा बीतती है…

31.
मिलना था किस्मत में नहीं,
फिर क्यों दिल को तड़पाया इतना…

32.
तेरे बाद कोई भी खास नहीं लगता,
अब तो आईना भी बेगाना लगता है…

33.
दिल से रोना अब आदत बन गई है,
और मुस्कुराना एक मजबूरी…

34.
तेरी यादें ज़िन्दगी का हिस्सा बन गईं,
जो हर साँस के साथ चलती हैं…

35.
बिछड़ के तुझसे अब तक संभले नहीं,
जैसे जड़ से उखड़ गए हों…

36.
रिश्ते निभाना हर किसी के बस की बात नहीं,
सच्चाई चाहिए, जो हर दिल में नहीं…

37.
जिसे चाहा था वो ही रूठ गया,
अब खुद से भी रिश्ता टूट गया…

38.
तेरी बेरुखी ने ही सिखा दिया,
कि मोहब्बत हर किसी के नसीब में नहीं…

39.
तेरे बिना तो ज़िन्दगी अधूरी सी है,
जैसे बिना धड़कन के दिल…

40.
खुद को खोकर तुझे चाहा था,
अब खुद से ही बेगाना लगता हूं…

41.
तेरी तस्वीर भी अब मुस्कराती नहीं,
शायद उसे भी मेरी हालत समझ आ गई…

42.
तेरा नाम अब भी सांसों में है,
पर अब आवाज़ नहीं देता…

43.
कभी सोचा नहीं था, यूँ अकेले रहेंगे,
तेरे बिना सब अधूरा सा लगेगा…

44.
तू पास नहीं फिर भी एहसास है तेरा,
हर पल में जैसे साया है तेरा…

45.
तेरे जाने के बाद जो खालीपन है,
उसे कोई भर नहीं पाया…

46.
ज़िन्दगी ने सिखा दिया,
कि मुस्कुराना ज़रूरी है, चाहे दिल रोता रहे…

47.
तेरे बिना दिल वैसा लगता है,
जैसे चाँद बिना रात…

48.
हर बात पे तुझे याद करना,
अब आदत सी बन गई है…

49.
अब तो आंसू भी थक गए हैं,
तेरे लिए बहते-बहते…

50.
कभी वक्त मिले तो सोचना ज़रूर,
कि कोई था जो सिर्फ तेरा हुआ करता था…

51.
किसी के साथ इतनी उम्मीद मत रखना,
कि उम्मीद के साथ खुद भी टूट जाओ !

52.
किसी ने पूछा,
इतना अच्छा कैसे लिख लेते हो
मैंने कहा दिल तोड़ना पड़ता है
लफ्जों को जोड़ने से पहले !

53.
कभी कभी वक्त के साथ सब कुछ ठीक नहीं,
सब कुछ खत्म हो जाता है,
जैसे मेरे साथ हुआ !

54.
सांसे किसी का इंतजार नहीं करती,
ये चलते चलते चली ही जाती है,
इसलिए मैं किसी का इंतजार नहीं करता !

55.
मैं मुसाफिर हूं कोई ठिकाना न रहा
बसर करता हूं दूर किसी वीराने में,
मैं महफिल की ख्वाहिश में था कभी
अब चाहत ही न रही इस दीवाने में !

56.
जिंदगी के हर मोड़ पर तूने आजमाया है,
हर बार एक नया दर्द हमने पाया है।
अब तो आदत-सी हो गई है इन जख्मों की,
क्या पता खुदा ने मेरे लिए यही नसीब बनाया है।

57.
जब मैं इन दुखों से निकल जाऊंगी
तो मेरा पहला काम तुम्हें
पहचानने से इंकार होगा !

58.
अब खुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग जमाने वाला !

59.
रूह खिंच लो ए-मालिक
गमो का बोझ अब भारी हो चला है !

60.
जब सब कुछ अकेले बरदाश
करने की आदत हो जाए
तब फर्क नहीं पड़ता

61.
जब छोड़ दिया है तो जिक्र मत कर
मैं जिस भी हाल में ठीक हूं,
अब तू मेरी फिक्र मत कर !

62.
न कोई शिकवा और शिकायत रही अब
शायद न पहले जैसी चाहत रही अब !

63.
रात भर जागते हैं तेरी यादों के सहारे,
नींद भी अब रूठ गई है हमसे।
क्या करें इस दिल का जो तुझे भूलता नहीं,
बस धड़कता रहता है तेरे इंतजार में।

64.
ये मोहब्बत का गणित है दोस्तों,
यहां, दो में से एक गया तो
कुछ भी नहीं बचता दोस्त !

65.
बड़े शौक से उतरे थे
हम समंदर-ए-इश्क में,
एक लहर ने ऐसा डुबोया कि
अब तक किनारा ना मिला !

66.
यूं तो तमाम मसले
हल किए मैंने
पर अपने हृदय को
न्याय दिलाने में असमर्थ रहा !

67.
टूटे दिल की आवाज कोई सुनता नहीं,
आंखों का बहता दरिया कोई चुनता नहीं।
अल्फ़ाज़ तो हैं बहुत मेरे पास कहने को,
पर अब सुनने को कोई यहां रुकता नहीं।

68.
दिल आज भी तुम्हारी यादों में हैं,
मन खोया मेरा तुम्हारी बातों में है।
तुम थे मेरे पास, तो लगता था सब सही है,
अब जो तुम गए तो, तो लगता है पास कुछ नहीं है।

69.
प्यार मिल जाए तो सुकून देता है,
दूर चला जाए तो यकीन तोड़ देता है।
दिल को जब नहीं मिलता कोई सहारा,
तो आंसू नहीं छिपा पाता चेहरा बेचारा।

70.
अक्ल आती है तो शादी हो जाती है,
मोहब्बत आती है तो ज़िम्मेदारियाँ आ जाती हैं।
आराम का वक़्त आता है तो बीमारियाँ घेर लेती हैं,
ज़िंदगी समझ आने लगती है तो जाने का वक़्त आ जाता है।

71.
पूरी उम्र सपनों के पीछे भागते रह गए,
मनचाही ज़िंदगी की आस में जीते रहे।
यह भूल गए कि जो आज है वही असली ज़िंदगी है,
कल तो बस एक सपना है, जिसकी कोई ताबीर नहीं।

72.
ज़िंदगी का फ़लसफ़ा आज तक समझ नहीं आया,
एक तरफ़ कहती है सब्र का फल मीठा होता है।
और दूसरी तरफ़ कहती है कि वक़्त किसी का इंतज़ार नहीं करता,
कभी कहती है रुक जाओ, कभी कहती है चल पड़ो।

73.
कोशिश करो कि हर लम्हा किसी के साथ अच्छा गुज़रे,
क्योंकि ज़िंदगी का कुछ भरोसा नहीं कब साथ छोड़ दे।
ज़िंदगी तो चुपचाप गुज़र जाती है,
बस अच्छी यादें ही रह जाती हैं।

74.
ज़िंदगी का सच्चा सुकून तब मिलता है,
जब दिल में कोई गिला न हो, ज़ुबान पर शिकवा न हो।
किस्मत से कोई लड़ाई न हो,
और जो है उसी में रज़ा हो।

75.
एक आइडियल ज़िंदगी जीने के लिए नियम अपनाओ,
खाना आधा करो, चलना ज़्यादा करो।
मुस्कुराना तीन गुना बढ़ा दो,
और प्यार चार गुना कर दो।

76.
उम्र के साथ इंसान बड़ा अमीर हो जाता है,
चांदी बालों में, सोना दाँतों में आ जाता है।
मोती आँखों में, शक्कर खून में,
और कीमती पत्थर किडनी में आ जाते हैं।

77.
कुदरत का निज़ाम भी कितना अजीब है,
पंछी कीड़े खाते हैं, फिर कीड़े पंछियों को खा जाते हैं।
इंसान सब्ज़ियाँ खाता है जो मिट्टी से आती हैं,
और आख़िर में मिट्टी इंसान को खा जाती है।

78.
मुझसे मोहब्बत के लिए तेरी मौजूदगी ज़रूरी नहीं,
मेरे रग-रग में तेरी रूह का एहसास काफ़ी है।
आज़माते हैं लोग सब्र मेरा,
ज़िक्र तुम्हारा बार-बार करके।

79.
हमने रखा है दिल में बड़े एहतराम से,
वो ग़म जो दिया है तुमने मोहब्बत के नाम से।
चाहत के चिरागों में यही अजीब बात है,
मद्धम तो हो जाते हैं मगर बुझते नहीं।

80.
करो तलाश तो कोई मिल ही जाएगा,
मगर मेरी तरह तुम्हें कौन चाहेगा।
तुम्हें ज़रूर कोई हसरतों से देखेगा,
मगर वो आंखें हमारी कहाँ से लाएगा।

81.
जब हम किसी से मोहब्बत करते हैं,
तो उसे बहुत ऊँचा मुक़ाम देते हैं।
इतना ऊँचा मुक़ाम कि आख़िरकार,
वो शख़्स हमारी पहुँच से बाहर हो जाता है।

82.
रोने की सज़ा है ना रुलाने की सज़ा है,
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है।
हँसते-हँसते आ जाते हैं आँखों में आँसू,
ये एक ही शख़्स को बेपनाह चाहने की सज़ा है।

83.
हो जाए मोहब्बत तो हम सोचा नहीं करते,
चाँद जैसे लोगों से कभी धोखा नहीं करते।
जो हमारी महफ़िल में आ जाए तो ख़ुश आमदीद,
जो उठ के चला जाए उसे रोका नहीं करते।

84.
कभी आओ दस्तक दो मेरे दिल पर,
मोहब्बत पहले से कम हो तो शिकायत करना।
मेरे दिल में उतर सको तो शायद जान लो,
कितना मुश्किल है किसी से खामोश मोहब्बत करना।

85.
बड़ी शौक़ से करो तुम किसी और से मोहब्बत,
तेरे प्यार के जज़्बे मेरे क़ैदी तो नहीं।
हम ही वफ़ा करने वाले हर दम वफ़ा करेंगे,
एक है जान हमारी, वो भी तुम पे फ़िदा करेंगे।

86.
ज़िंदगी सिसकी से शुरू हो कर, हिचकी पर खत्म हो जाती है.
ये छोटा सा सफर, बहुत चुपचाप गुजर जाता है.
अपने कर्मों के दीप जलाओ, रौशनी फैलाओ चारों ओर.
ताकि मौत की राह में अंधेरा महसूस ना हो.

87.
बारिश की तरह खुशियाँ बरसती रहें तुझ पर.
हर बूँद तेरे दिल से हर ग़म को मिटा दे.
सुकून हो तेरी हर साँस में, हर पल तेरा हो.
तू मुस्कुराता रहे, तेरी आँख कभी नम ना हो.

88.
मेरी हँसती हुई ज़िंदगी वीरान बना गई.
दिल पर ज़ख़्म का नया निशान बना गई.
वक़्त बुरा था या हम ही ग़लत थे शायद.
वो दिल से खेलकर अजनबी बना गई.

89.
साथ चलने को निकले थे सारे दोस्त रास्तों में.
पर मेरी मंज़िल का साथी तो बस साया निकला.
अपनों ने भी ना सोचा कि मैं बिखर जाऊँगी.
बिना घोंसले के परिंदे अक्सर मर ही जाते हैं.

90.
वो ईद के चाँद की तरह कभी-कभी नजर आता है.
जो हर रोज़ ख्वाबों में आता था, अब ख्वाबों में ही रह गया.
ये भी ख्वाबों की मेहरबानी है शायद.
जाने वाले अब भी कभी-कभी दिख जाते हैं.

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