गुलज़ार साहब की शायरी अपनी सादगी में ही सबसे ज़्यादा गहरी लगती है। gulzar shayari in hindi प्यार, तन्हाई, खामोशी और ज़िंदगी की उलझनों को ऐसे अल्फ़ाज़ देती है, जो बिना शोर किए सीधे दिल में उतर जाते हैं और देर तक एहसास बनकर ठहर जाते हैं।
उनकी शायरी में भावनाएँ दिखाई नहीं देतीं, महसूस होती हैं। यह कलेक्शन गुलज़ार साहब की उन चुनिंदा पंक्तियों के भाव को दर्शाता है, जहाँ कम शब्दों में बड़ी बातें कही जाती हैं और हर शेर ज़िंदगी का एक सच्चा पहलू सामने रख देता है।
मोहब्बत भी बारिश की तरह होती है
कभी बूंदों में, कभी बाढ़ बन के आती है
लफ़्ज़ों की तरह तन्हा मत रहा करो तुम
गुलज़ार की शायरी में बस जाया करो तुम
इश्क़ एक रहस्य है, समझ में नहीं आता
पर जब होता है, सब समझ आ जाता है
तुम्हारी मुस्कान में कुछ बात है
दिल चुरा लेने की सौगात है
वो लम्हे ही सबसे खूबसूरत थे
जब तुम पास थे और ज़िंदगी खास थी
तुम आए ज़िंदगी में जैसे बहार आ गई
सूनी राहों में भी अब खुशबू सी छा गई
मेरी तन्हाइयों में तेरा नाम गूंजता है
गुलज़ार की कलम से जैसे कोई नग़मा बनता है
तुमसे मिलने की आरज़ू रहती है हर वक्त
जैसे किताबों में गुलज़ार के अल्फाज़ रहते हैं
चुपके से आई थी वो ज़िंदगी में
और दिल का सुकून बन गई
मोहब्बत वो एहसास है जो लफ़्ज़ों में नहीं
सिर्फ़ जिया जा सकता है… तेरे साथ
इश्क़ में गुलज़ार की शायरी जैसी मिठास है
हर मिसरे में तेरी ही तलाश है
रात भर तुझे सोचकर जागते हैं हम
जैसे गुलज़ार साहब हर शेर में जागते हैं
तेरे बिना अधूरी सी लगती है ये ज़िंदगी
जैसे बिन अल्फाज़ शायरी अधूरी लगती है
तेरे ख्यालों में डूबे रहते हैं हर रोज़
जैसे गुलज़ार की स्याही में दर्द बसा हो
दिल से निकली हर बात में तेरा ही जिक्र होता है
जैसे गुलज़ार की शायरी में हर बार जादू होता है
हम तो तेरे इश्क़ में पिघल चुके हैं
जैसे मोमबत्ती बन कर स्याही में ढल चुके हैं
तेरे साथ बिताए हर पल की अलग कहानी है
जैसे गुलज़ार की हर लाइन में जादू छुपा है
तुझसे बात ना हो तो दिन अधूरा सा लगता है
जैसे गुलज़ार की किताब बिना आखिरी पन्ने के हो
गुलज़ार की तरह तुझसे भी मोहब्बत है मुझे
जो अल्फाज़ नहीं, एहसासों में ढलती है
तेरी हँसी से रोशन हो जाती है शाम
जैसे शायरी में चाँद उतर आया हो
इश्क़ का मतलब समझाया तुमने
वरना हम तो बस गुलज़ार की किताबें पढ़ते थे
जो तेरे बिना अधूरा सा था
वो अब तेरे साथ मुकम्मल है
तू मिले तो हर दर्द ग़ज़ल बन गया
जैसे गुलज़ार ने खुद लिख दी हो मेरी तक़दीर
तेरे ख्यालों से निकलना मुश्किल है
जैसे गुलज़ार की शायरी से निकलना नामुमकिन
ज़िंदगी जब भी रूठती है मुझसे
तेरी यादें मनाने आ जाती हैं
कुछ बातें सिर्फ़ महसूस की जाती हैं
जैसे गुलज़ार की शायरी बिना आवाज़ के सुनाई देती है
तेरे बिना मेरा दिल कुछ नहीं कहता
जैसे बिना कलम गुलज़ार कुछ नहीं लिखता
हर एक लम्हा तुझसे जुड़ा हुआ लगता है
जैसे हर शेर गुलज़ार से जुड़ा लगता है
तुम ही हो जो हर शायरी में बसते हो
जैसे गुलज़ार की रचनाओं में जज़्बात बसते हैं
ख्वाबों में भी तुमसे मुलाकात होती है
जैसे रातों में गुलज़ार की कविता जागती है
जब भी मोहब्बत की बात होती है
तेरे नाम से शुरुआत होती है
तुझे चाहा है उस ख़ामोशी से
जिस ख़ामोशी से गुलज़ार ने इश्क़ लिखा है
तेरा नाम भी अब मेरी धड़कनों सा है
हमेशा चलता है, पर दिखाई नहीं देता
तुझसे मिलकर वक़्त भी रुक सा गया था
जैसे गुलज़ार की शायरी में लम्हा ठहर गया हो
लफ़्ज़ ढूंढे तुझे बयाँ करने को
फिर गुलज़ार की शायरी मिल गई
एक तुम हो जो हर शायरी में बसते हो
और एक गुलज़ार हैं जो हर एहसास में रहते हैं
तेरे बिना कुछ भी अधूरा लगता है
जैसे बिना अल्फ़ाज़ गुलज़ार की कविता अधूरी हो
तुझे याद करके ही दिन की शुरुआत होती है
जैसे गुलज़ार की चाय सुबह की पहली चुस्की हो
तेरे नाम की खुशबू बसी है हवाओं में
जैसे गुलज़ार की शायरी बसी हो हर दिल में